प्रदेश में चार बड़े सीमेंट ब्लॉक आवंटनों को लेकर खान राज्य मंत्री राजकुमार रिणवा भले ही जानकारी होने से इनकार करते रहे हैं, लेकिन उन्होंने खुद इन आवंटनों को मंजूरी दी थी।
सीमेंट ब्लॉक आवंटन घोटाले का '13 मार्च 2015' को'राजस्थान पत्रिका' में खुलासा हुआ था। मामला पिछले विधानसभा सत्र में भी उठा, लेकिन जांच नहीं कराई गई। जांच होती तो पता लग जाता कि फाइलों को विभाग में कैसे पंख लगे कि सालों से धूल खा रही फाइलों को चंद दिनों में ही निपटा दिया गया।
एक फाइल पर तो बाबू से लेकर मंत्री ने एक ही दिन में हस्ताक्षर कर आवंटन कर दिया। सवाल यह उठता है कि प्रत्येक सीमेंट ब्लॉक पर हालांकि देश-विदेश की कंपनियों के 50 से 70 तक आवेदन थे, लेकिन आवंटन 'चहेती' कंपनी को ही दिया गया।
क्या है यूएनएफसी 1997
खनिज क्षेत्रों में कितना मिनरल रिजर्व है, इसकी पुष्टि करने के लिए यह एक प्रकार का मानक है। जिसे पूरे विश्व में अपनाया जा रहा है। भारत सरकार ने भी इसकी पालना में प्रोस्पेक्टिंग के निर्देंश दिए हैं। इसके तहत प्रोस्पेक्टिंग होने पर ही आईबीएम (इण्डियन ब्यूरो ऑफ माइंस) खान चलाने के लिए माइनिंग प्लान मंजूर करता है।
क्या इनकार करने आए सुनवाई में?
कंपनी चयन की सुनवाई के पौने दो साल बाद चारों कंपनियों के चयन में एक समानता यह है कि अनुपस्थित रहने वाली कंपनियों के प्रतिनिधियों के अलावा जो भी सुनवाई में शामिल हुए उन्होंने खान लेने से इनकार करने का पत्रावली में जिक्र किया है।
सवाल यह उठता है कि जो कंपनी प्रतिनिधि सुनवाई में शामिल हुए वो क्या इनकार करने के लिए ही आए थे। जबकि खान लेने की दौड़ में अल्ट्राट्रेक सीमेंट (आदित्य बिरला ग्रुप), जेके ग्रुप, रिलायंस, अम्बुजा, डालमिया, अभिजीत सीमेंट सहित कई बड़ी कंपनियां शामिल थी।
केन्द्र के नियमों की अनदेखी
केन्द्र के नियम 'यूएनएफसी 1997' के तहत उस क्षेत्र की प्रोस्पेक्टिंग (पूर्वेक्षण) होने पर ही सीधे खनन पट्टे के मंशापत्र जारी किए जा सकते हैं। नियम की पालना नहीं होने से ईमामी सीमेंट कंपनी ने आईबीएम से माइनिंग प्लान अनुमोदन कराने के लिए स्वीकृत क्षेत्र की प्रोस्पेक्टिंग को लेकर राज्य सरकार को पत्र लिखा है। स्पष्ट है कि प्रोस्पेक्टिंग यूएनएफसी के तहत नहीं की गई। खान निदेशालय उदयपुर में कंपनी के खर्चे पर विभाग की ओर से प्रोस्पेक्टिंग कराने का प्रस्ताव राज्य सरकार को भेजा है।
फिर पहले क्यों बचाया...
पत्रिका के खुलासे के बाद जब सदन में पहले मामला उठाया था, तब मंत्री राजकुमार रिणवा ने अधिकारियों का बचाब कर कहा था कि आवंटन में गड़बड़ी नहीं हुई। लेकिन अब खान विभाग में हो रहे गड़बड़ झाले के लिए मंत्री को जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा दे देना चाहिए। अब उनकी ईमानदारी कहां गई।
उधर, खान मंत्री को बचाने के लिए गृहमंत्री ने बयान दिया है कि उनके पास फाइल नहीं जाती थी तो वे किस बात के मंत्री हैं, क्यों मंत्री बनने की शपथ ली।
रमेश मीणा, विधायक कांग्रेस
मैसर्स ईमामी सीमेंट लि.
52 आवेदक कंपनी
20 आवेदक अनुपस्थित
07 आवेदकों के कागजों में कमी
25 ने खान लेने से इनकार किया
मैसर्स लाफार्ज इ.प्रा.लि.
58 आवेदक कंपनी
20 आवेदक अनुपस्थित
08 आवेदकों के कागजों में कमी
30 ने खान लेने से इनकार किया
(आवंटन - 8.32 वर्ग किमी, गांव पारेवर एसएन-2, जिला जैसलमेर)
मैसर्स श्री सीमेंट लि.
54 आवेदक कंपनी
20 आवेदक अनुपस्थित
06 आवेदकों के कागजों में कमी
28 ने खान लेने से इनकार किया
मैसर्स वण्डर सीमेंट लि.
69 आवेदक कंपनी
27 आवेदक अनुपस्थित
10 आवेदकों के कागजों में कमी
32 ने खान लेने से इनकार किया
(आवंटन - 255.0032 हेक्टेयर, गांव कारूण्डा, पायरी, धनोरा, मालियाखेड़ी, जिला चित्तौडग़ढ़)
कहीं टिप्पणी तो कहीं सीधे साइन
इन फाइलों को देखने से पता चलता है कि एक नहीं मंत्री के पास फाइलें दो-दो बार हस्ताक्षरों के लिए गई। मंत्री राजकुमार रिणवा ने कहीं नियमानुसार कार्रवाई करने को लेकर टिप्पणी की तो कहीं सीधे ही हस्ताक्षर कर दिए।
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